Thursday, September 11, 2014

Gujarat TET - 2014 Level 2 (Upper Primary Level) Science Math Paper

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Gujarat TET - 2014 Level 2 (Upper Primary Level) Science Math Paper
GTET, GUJARAT TEACHER ELIGIBILITY TEST,

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Sunday, September 7, 2014

Sangya (Noun)

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Sangya (Noun)

संज्ञा की परिभाषा  - संज्ञा को 'नाम' भी  कहा जाता है .
किसी प्राणी , वस्तु , स्थान , भाव आदि का 'नाम' ही उसकी संज्ञा कही जाती है .
संज्ञा तीन प्रकार की होती है.
१. व्यक्तिवाचक संज्ञा - जो किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु का बोध कराती है, 
यथा - सीता, युमना, आगरा.
२. जातिवाचक संज्ञा  - जो संज्ञा किसी जाति का बोध कराती है 
यथा -नदी , पर्वत 
३. भाववाचक संज्ञा  - किसी भाव , गुण, दशा आदि का बोध कराने वाले शब्द
भाववाचक संज्ञा होते  है, 
यथा -मिठास , कालिमा, 

English:



Definition:


Nouns are also known as the 'names'. Thus, the name of any person, thing, place etc. is called Noun.

In Hindi, Nouns are of three types:

1. Proper Noun (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
2. Common Noun (जातिवाचक संज्ञा)
3. Abstract Noun (भाववाचक संज्ञा)


1. Proper Noun: A Proper Noun is one which specifically refers to a Person, a Place or a Thing.

Example: Seeta (Name of a Person)
                 Yamuna (Name of a River)
                 Agra (Name of a Place)

2. Common Noun: A Common Noun is one which refers to the common name of a Person, a Place or a Thing.

Example: River
                 Mountain
                 City

3. Abstract Noun: An Abstract Noun is one which represent feeling, ideas and qualities,

Example: Sweetness,
                  Darkness
                  Honesty
                  Goodness


सर्वनाम

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सर्वनाम  

संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किये जाने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं।     

यथा :- आप , तू , यह , वह , कुछ , कोई आदि  !

सर्वनाम के छह भेद होते हैं  !

1 - पुरुषवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता अपने लिए एवं किसी अन्य के लिए करता है , वह 

पुरुषवाचक सर्वनाम होता है जैसे -आप कहाँ रहते हैं  !

इसके तीन भेद होते हैं  !

1 -  उत्तम  पुरुष - मैं  , हम 
2 -  मध्यम पुरुष -  तू ,  तुम , आप 
3 -  अन्य पुरुष -  वह , उसे , उन्हें 

2 - निजवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम का प्रयोग कर्ता कारक स्वयं के लिए करता है 

यथा - मैं अपने आप चला जाऊँगा , खुद अपने - आदि !


3 -  निश्चयवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम से किसी वस्तु या व्यक्ति अथवा पदार्थ के विषय में ठीक और निश्चित ज्ञान हो , 
      जैसे - यह मेज है !

4 - अनिश्चयवाचक सर्वनाम - वह सर्वनाम ,जो किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध नहीं कराए ,
     जैसे - कुछ काम करो आदि !

5 - प्रश्नवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम का प्रयोग प्रश्न करने के लिए किया जाता है 

     जैसे - आपने क्या खाया है ?

6 - सम्बन्धवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम से एक शब्द या वाक्य का दूसरे शब्द या वाक्य से सम्बन्ध जाना जाता है 

     जैसे - जो करेगा सो भरेगा , जो जागेगा सो पावेगा , जो सोवेगा सो खोवेगा !

कारक

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कारक 

जो किसी शब्द का क्रिया के  साथ सम्बन्ध बताए  वह कारक है !

कारक के आठ भेद हैं :-

जिनका विवरण इस  प्रकार है :-

 कारक                                                             कारक चिन्ह 

1. कर्ता                                                              ने 

2. कर्म                                                               को 

3. करण                                                             से , के द्वारा 

4. सम्प्रदान                                                        को , के लिए 

5. अपादान                                                         से (अलग करना )  

6. सम्बन्ध                                                         का , की , के 

7. अधिकरण                                                      में , पर 

8. सम्बोधन                                                        हे , अरे      

विशेषण

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विशेषण

जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है उसे विशेषण कहते हैं। 

जैसे: मोटा आदमी, नीला आसमान आदि। 

विशेषण के चार भेद होते हैं: 

1. गुणवाचक विशेषण : जो शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु  के गुण, दोष, रंग, आकार, अवस्था, स्तिथि, स्वभाव, दशा, दिशा, स्पर्श, गंध, स्वाद आदि का बोध कराये, गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं, जैसे काला, गोरा, अच्छा, सुंदर, ख़राब, गीला , रोगी, छोटा, कठोर, कोमल ,  खट्टा , नमकीन, बिहारी, सुगन्धित आदि। 

2. परिमाणवाचक विशेषण: वह विशेषण जो अपने विशेष्यों की निश्चित या अनिश्चित मात्रा का बोध कराए। 
     इसके दो भेद होते हैं 
     1. निश्चित परिमाणवाचक विशेषण:- जहाँ नाप, तोल या माप निश्चित हो, जैसे एक किलो चीनी, दो मीटर कपडा। 
     2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण: :- जहाँ नाप, तोल या माप अनिश्चित हो जैसे थोड़ी चीनी, कुछ लकड़ी। 
3. संख्यावाचक विशेषण :- संख्या संबंधी विशेषता बताने वाले शब्दों को संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।
     ये दो प्रकार के होते हैं:
     1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण: जहाँ संख्या निश्चित हो, जैसे पांच लड़के, दो छात्र। 
     2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण: जहाँ संख्या अनिश्चित हो जैसे सैंकड़ों लोग, अनेक लडकियां।
4. सार्वनामिक विशेषण :- वे सर्वनाम शब्द जो संज्ञा शब्द से पहले आकर उसकी विशेषता बताते हैं, सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं, जैसे 
     कौन लोग आये हैं ?

क्रिया : CTET Study Material

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क्रिया :-

जिस शब्द से किसी कार्य का होना या करना समझा जाय , उसे क्रिया कहते हैं ! जैसे - खाना , पीना  , सोना , रहना , जाना आदि !

क्रिया के दो भेद हैं :- 

1- सकर्मक क्रिया :-  जो क्रिया कर्म के साथ आती है , उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं !
    जैसे - मोहन फल खाता है ! ( खाना क्रिया के साथ कर्म फल है  )


 2- अकर्मक क्रिया :-  अकर्मक क्रिया के साथ कर्म नहीं होता तथा उसका फल कर्ता पर पड़ता है !
     जैसे - राधा रोती है ! ( कर्म का अभाव है तथा रोती है क्रिया का फल राधा पर पड़ता है  )

-  रचना के आधार पर क्रिया के पाँच भेद है :-

1- सामान्य क्रिया :-वाक्य में केवल एक क्रिया का प्रयोग ! जैसे -  तुम चलो , मोहन पढ़ा  आदि !


2- संयुक्त क्रिया :-  दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनी क्रियाएँ संयुक्त क्रियाएँ होती है ! जैसे - गीता स्कूल चली गई आदि !

3- नामधातु क्रियाएँ :-  क्रिया को छोड़कर दुसरे शब्दों  ( संज्ञा , सर्वनाम , एवं  विशेषण  ) से जो धातु बनते है , उन्हें नामधातु क्रिया कहते है जैसे -  अपना - अपनाना , गरम - गरमाना  आदि !

4- प्रेरणार्थक क्रिया :-  कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य को करने की प्रेरणा देता है  जैसे - लिखवाया , पिलवाती आदि !

5- पूर्वकालिक क्रिया :-  जब कोई कर्ता एक क्रिया समाप्त करके दूसरी क्रिया करता है तब पहली क्रिया  ' पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है जैसे -  वे पढ़कर चले गये  ,  मैं नहाकर जाउँगा  आदि !

वचन:-

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वचन:-

संज्ञा अथवा अन्य विकारी शब्दों के जिस रूप में संख्या का  बोध हो , उसे वचन कहते हैं !

वचन के दो भेद होते हैं - 

1-  एकवचन :-  संज्ञा के जिस रूप से एक ही वस्तु , पदार्थ या प्राणी का बोध होता है , उसे एकवचन कहते हैं !
     जैसे -  लड़की , बेटी , घोड़ा , नदी आदि !

2-  बहुवचन :-  संज्ञा के जिस रूप से एक से अधिक वस्तुओं , पदार्थों या प्राणियों का बोध होता है , उसे बहुवचन कहते हैं !
     जैसे -  लड़कियाँ , बेटियाँ , घोड़े  , नदियाँ  आदि !

-  एकवचन से  बहुवचन बनाने के नियम इस प्रकार हैं -

1-   को एं कर देने से =    रात = रातें 

2-  अनुस्वारी  ( . ) लगाने से =    डिबिया =  डिबियां 

3-  यां जोड़ देने से =    रीति =  रीतियां 

4-  एं लगाने से =   माला =  मालाएं 

5-    को कर देने से =   बेटा =  बेटे

लिंग

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लिंग :-

संज्ञा के जिस रूप से किसी जाति  का बोध होता है ,उसे लिंग कहते हैं !

इसके दो भेद होते हैं :-

1-  पुल्लिंग :-  जिस संज्ञा शब्दों से पुरुष जाति का बोध होता है , उसे पुल्लिंग कहते हैं -  जैसे - बेटा , राजा  आदि !

2-  स्त्रीलिंग :-  जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का  बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं -  जैसे -  बेटी , रानी आदि !

स्त्रीलिंग प्रत्यय -

पुल्लिंग शब्द को स्त्रीलिंग बनाने के लिए कुछ प्रत्ययों को शब्द में जोड़ा जाता है जिन्हें स्त्री प्रत्यय कहते हैं ! जैसे - 

1.   =   बड़ा - बड़ी , भला - भली 

2.  इनी =  योगी - योगिनी , कमल - कमलिनी 

3.  इन =   धोबी - धोबिन , तेली - तेलिन 

4.  नी =   मोर - मोरनी , चोर - चोरनी 

5.  आनी =  जेठ - जेठानी , देवर - देवरानी 

6.  आइन =   ठाकुर - ठकुराइन , पंडित - पंडिताइन 

7.  इया =   बेटा - बिटिया , लोटा - लुटिया 


कुछ शब्द अर्थ की द्रष्टि से समान होते हुए भी लिंग की द्रष्टि से भिन्न होते हैं ! उनका उचित प्रयोग करना चाहिए !जैसे -               

      पुल्लिंग                        स्त्रीलिंग 
                     
1.   कवि                            कवयित्री 

2.   विद्वान                          विदुषी 

3.   नेता                             नेत्री 

4.   महान                           महती 

5.   साधु                             साध्वी 

(  ऊपर दिए गए  शब्दों का सही प्रयोग करने पर ही शुद्ध वाक्य बनता है !  )

जैसे :-   1-  वह एक विद्वान लेखिका है -   (  अशुद्ध वाक्य  )
                 
                 वह एक विदुषी लेखिका है -   (   शुद्ध वाक्य    )

वाच्य :-

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वाच्य :-


क्रिया के जिस रूपांतर से यह बोध हो कि क्रिया द्वारा किए गए विधान का केंद्र बिंदु कर्ता है ,

कर्म अथवा क्रिया -भाव , उसे वाच्य कहते हैं !

वाच्य के तीन भेद हैं - 

1- कर्तृवाच्य -  जिसमें कर्ता प्रधान हो उसे कर्तृवाच्य कहते हैं !

    कर्तृवाच्य में क्रिया के लिंग , वचन आदि कर्ता के समान होते हैं , जैसे - सीता गाना गाती है , 
     इस वाच्य में सकर्मक और अकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है !
     कभी -कभी कर्ता के साथ  ' ने '  चिन्ह नहीं लगाया जाता !

2-  कर्मवाच्य -  जिस वाक्य में कर्म प्रधान होता है , उसे कर्मवाच्य कहते हैं !

    कर्मवाच्य में क्रिया के लिंग , वचन आदि कर्म के अनुसार होते हैं , जैसे - रमेश से पुस्तक 
    लिखी जाती है ! इसमें केवल  ' सकर्मक ' क्रियाओं का प्रयोग होता है !

3-  भाववाच्य -  जिस वाक्य में भाव प्रधान होता है , उसे भाववाच्य कहते हैं !

     भाववाच्य में क्रिया की प्रधानता रहती है , इसमें क्रिया सदा एक वचन , पुल्लिंग और 
     अन्य पुरुष में आती है ! इसका प्रयोग प्राय: निषेधार्थ में होता है , 
     जैसे - चला नहीं जाता , पीया नहीं जाता !

-  कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाना :-


          ( कर्तृवाच्य )                             ( कर्मवाच्य )

1-   रीमा चित्र बनाती है !               -  रीमा द्वारा चित्र बनाया जाता है !

2-   मैंने पत्र लिखा !                     -  मुझसे पत्र लिखा गया !


-  कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाना :-

          ( कर्तृवाच्य )                             ( भाववाच्य )

1-   मैं नहीं पढ़ता !                      -   मुझसे पढ़ा नहीं जाता !

2-   राम नहीं रोता है !                  -   राम से रोया नहीं जाता !

विराम चिन्ह

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विराम चिन्ह 


भाषा में स्थान -विशेष पर रुकने अथवा उतार -चढ़ाव आदि दिखाने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है उन्हें ही  ' विराम चिन्ह ' कहते है !
                   
               
1. पूर्ण विराम :-  ( )
                             
 - प्रत्येक वाक्य की समाप्ति पर इस चिन्ह का प्रयोग किया जाता है !

2. उपविराम :-   ( : )

 - उपविराम का प्रयोग संवाद -लेखन एकांकी लेखन या नाटक लेखन में वक्ता के नाम 
   के बाद किया जाता है !   

3. अर्ध विराम :-  ( ; )

  - इसमें उपविराम से भी कम ठहराव होता है ! यदि खंडवाक्य का आरंभ वरन, पर , परन्तु ,
    किन्तु , क्योंकि इसलिए , तो भी आदि शब्दों से हो तो उसके पहले इसका प्रयोग करना 
    चाहिए ! 

4. अल्प विराम :-  ( , )

  - इसमें बहुत कम ठहराव होता है !

5. प्रश्नबोधक :-  ( ? )    

6. विस्मयादिबोधक :-  ( ! )

 - विस्मय , हर्ष , शोक , घृणा , प्रेम आदि भावों को प्रकट करने वाले शब्दों के आगे इसका 
   प्रयोग होता है !

7. निर्देशक चिन्ह :-   ( _ )

8. योजक चिन्ह :-     ( - )

 - द्वन्द्व समास के दो पदों के बीच , सहचर शब्दों के बीच प्रयोग !

9. कोष्ठक चिन्ह :-   ( )

10. उदधरण चिन्ह :-  (  " "  )

11. लाघव चिन्ह :-  ( o )

12. विवरण चिन्ह :-  (  :- )

Sandhi (Seam)

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Sandhi (Seam) संधि


संधि :-

दो पदों में संयोजन होने पर जब दो वर्ण पास -पास आते हैं , तब उनमें जो विकार सहित 
मेल होता है , उसे संधि कहते हैं !

संधि तीन प्रकार की होती हैं :-

1. स्वर संधि -  दो स्वरों के पास -पास आने पर उनमें जो रूपान्तरण होता है , उसे स्वर 
                   कहते है !  स्वर संधि के पांच भेद हैं :-

1. दीर्घ स्वर संधि 

2. गुण स्वर संधि 

3. यण स्वर संधि 

4. वृद्धि स्वर संधि 

5. अयादि स्वर संधि 

1-  दीर्घ स्वर संधि-    जब दो सवर्णी स्वर पास -पास आते हैं , तो मिलकर दीर्घ हो जाते हैं !
     जैसे -

1. अ+अ = आ          भाव +अर्थ = भावार्थ 

2. इ +ई =  ई           गिरि +ईश  = गिरीश 

3. उ +उ = ऊ           अनु +उदित = अनूदित 

4. ऊ +उ  =ऊ          वधू +उत्सव =वधूत्सव 

5. आ +आ =आ        विद्या +आलय = विधालय   

2-   गुण संधि :-  अ तथा आ के बाद इ , ई , उ , ऊ तथा ऋ आने पर क्रमश: ए , ओ तथा 
      अनतस्थ  र होता है इस विकार को गुण संधि कहते है !
      जैसे :-

1. अ +इ =ए           देव +इन्द्र = देवेन्द्र 

2. अ +ऊ =ओ         जल +ऊर्मि = जलोर्मि 

3. अ +ई =ए            नर +ईश = नरेश 

4. आ +इ =ए           महा +इन्द्र = महेन्द्र 

5. आ +उ =ओ          नयन +उत्सव = नयनोत्सव 

3- यण स्वर संधि :-   यदि इ , ई , उ , ऊ ,और ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो इनका 
    परिवर्तन क्रमश:  य , व् और  र में हो जाता है ! जैसे -  

1. इ का य = इति +आदि = इत्यादि 

2. ई का य = देवी +आवाहन = देव्यावाहन 

3. उ का व = सु +आगत = स्वागत 

4. ऊ का व = वधू +आगमन = वध्वागमन 

5. ऋ का र = पितृ +आदेश = पित्रादेश 

3-  वृद्धि स्वर संधि :-  यदि  अ  अथवा  आ के बाद ए अथवा ऐ हो तो दोनों को मिलाकर 
     ऐ और यदि ओ  अथवा औ हो तो दोनों को मिलाकर औ हो जाता है ! जैसे  - 

1. अ +ए =ऐ        एक +एक =  एकैक 

2. अ +ऐ =ऐ        मत +ऐक्य = मतैक्य 

3. अ +औ=औ      परम +औषध = परमौषध 

4. आ +औ =औ    महा +औषध = महौषध 

5. आ +ओ =औ     महा +ओघ = महौघ 

5- अयादि स्वर संधि :-  यदि ए , ऐ और ओ , औ के पशचात इन्हें छोड़कर कोई अन्य स्वर 
    हो तो इनका परिवर्तन क्रमश: अय , आय , अव , आव में हो जाता है जैसे - 

1. ए का अय          ने +अन = नयन 

2. ऐ का आय         नै +अक = नायक 

3. ओ का अव         पो +अन = पवन 

4. औ का आव        पौ +अन = पावन 

5. का परिवर्तन में =   श्रो +अन = श्रवण 

2- व्यंजन संधि :-  व्यंजन के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उस व्यंजन में जो 
    रुपान्तरण होता है , उसे व्यंजन संधि कहते हैं जैसे :- 

1. प्रति +छवि = प्रतिच्छवि 

2. दिक् +अन्त = दिगन्त 

3. दिक् +गज = दिग्गज 

4. अनु +छेद =अनुच्छेद 

5. अच +अन्त = अजन्त  

3- विसर्ग संधि : -  विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन का मेल होने पर जो विकार होता है ,                          
    उसे विसर्ग संधि कहते हैं ! जैसे -

1. मन: +रथ = मनोरथ 

2. यश: +अभिलाषा = यशोभिलाषा 

3. अध: +गति = अधोगति 

4. नि: +छल  = निश्छल 

5. दु: +गम = दुर्गम

Hindi Samas - Preparation for Central Teacher Eligibility Test Exam

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Hindi Samas - Preparation for Central Teacher Eligibility Test Exam

समास -


दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नए शब्द बनाने की क्रिया को समास कहते हैं !
सामासिक पद को विखण्डित करने की क्रिया को विग्रह कहते हैं !

समास के छ: भेद हैं -

1- अव्ययीभाव समास - जिस समास में पहला पद प्रधान होता है तथा समस्त पद अव्यय का 
     काम करता है , उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं !जैसे - 

      ( सामासिक पद )                     ( विग्रह )

1.      यथावधि                          अवधि के अनुसार    

2.      आजन्म                           जन्म पर्यन्त 

3.      प्रतिदिन                           दिन -दिन 

4.      यथाक्रम                           क्रम के अनुसार 

5.      भरपेट                              पेट भरकर 


2- तत्पुरुष समास -  इस समास में दूसरा पद प्रधान होता है तथा विभक्ति चिन्हों का लोप 
     हो जाता है !  तत्पुरुष समास के छ: उपभेद विभक्तियों के आधार पर किए गए हैं -

1. कर्म तत्पुरुष 

2. करण तत्पुरुष

3. सम्प्रदान तत्पुरुष 

4. अपादान तत्पुरुष 

5. सम्बन्ध तत्पुरुष 

6. अधिकरण तत्पुरुष 

- उदाहरण इस प्रकार हैं - 

        ( सामासिक पद )                   ( विग्रह )                           ( समास )

1.       कोशकार                          कोश को करने वाला               कर्म तत्पुरुष 

2.       मदमाता                          मद से माता                         करण तत्पुरुष 

3.       मार्गव्यय                         मार्ग के लिए व्यय                 सम्प्रदान तत्पुरुष 

4.       भयभीत                           भय से भीत                         अपादान तत्पुरुष 

5.       दीनानाथ                          दीनों के नाथ                        सम्बन्ध तत्पुरुष 

6.       आपबीती                          अपने पर बीती                      अधिकरण तत्पुरुष                           




3- कर्मधारय समास -  जिस समास के दोनों पदों में विशेष्य - विशेषण या उपमेय - उपमान     सम्बन्ध हो तथा दोनों पदों में एक ही कारक की विभक्ति आये उसे कर्मधारय समास
    कहते हैं !  जैसे :-
       ( सामासिक पद )                 ( विग्रह )
1.      नीलकमल                     नीला है जो कमल
2.      पीताम्बर                       पीत है जो अम्बर
3.      भलामानस                    भला है जो मानस
4.      गुरुदेव                           गुरु रूपी देव
5.      लौहपुरुष                       लौह के समान ( कठोर एवं शक्तिशाली  ) पुरुष

4-  बहुब्रीहि समास -  अन्य पद प्रधान समास को बहुब्रीहि समास कहते हैं !इसमें दोनों पद
     किसी अन्य अर्थ को व्यक्त करते हैं और वे किसी अन्य संज्ञा के विशेषण की भांति कार्य
     करते हैं ! जैसे -
       ( सामासिक पद )               ( विग्रह )
1.      दशानन                        दश हैं आनन जिसके  ( रावण )
2.      पंचानन                        पांच हैं मुख जिनके    ( शंकर जी )
3.      गिरिधर                        गिरि को धारण करने वाले   ( श्री कृष्ण )
4.      चतुर्भुज                        चार हैं भुजायें जिनके  ( विष्णु )
5.      गजानन                       गज के समान मुख वाले  ( गणेश जी )

5-  द्विगु समास -  इस समास का पहला पद संख्यावाचक होता है और सम्पूर्ण पद समूह
     का बोध कराता है ! जैसे -      
         ( सामासिक पद )                  ( विग्रह )
1.        पंचवटी                           पांच वट वृक्षों का समूह
2.        चौराहा                            चार रास्तों का समाहार
3.        दुसूती                             दो सूतों का समूह
4.        पंचतत्व                          पांच तत्वों का समूह
5.        त्रिवेणी                            तीन नदियों  ( गंगा , यमुना , सरस्वती  ) का समाहार

6-  द्वन्द्व समास -  इस समास में दो पद होते हैं तथा दोनों पदों की प्रधानता होती है ! इनका
     विग्रह करने के लिए  ( और , एवं , तथा , या , अथवा ) शब्दों का प्रयोग किया जाता है !
     जैसे -
          ( सामासिक पद )                      ( विग्रह )
1.         हानि - लाभ                        हानि या लाभ
2.         नर - नारी                           नर और नारी
3.         लेन - देन                           लेना और देना
4.         भला - बुरा                          भला या बुरा
5.         हरिशंकर                             विष्णु और शंकर 


समास (Hindi Samas) Prepapration for Teacher Eligibility Test

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 समास (Hindi Samas) Prepapration for Teacher Eligibility Test

परिवर्णी अंग्रेजी के ृ।बतवदलउश् का हिन्दी रूप है जो ग्रीक शब्दों ।ातवदए व्दवउं से बना है। ।ातवद का अर्थ है सबसे पहले का नाम, किनारा अथवा बाहरी भाग और व्दवउं का अर्थ हैµनाम। इस प्रकार ृ।बतवदलउश् का अर्थ हुआµवह नाम जो 'सबसे पहले के अथवा 'बाहरी या 'किनारे के अक्षरों से बना है। संक्षिपित की तरह परिवर्णी भी शब्द समूहों के प्रथम वर्ण या अक्षर को जोड़कर बनार्इ जाती है किन्तु उसका अर्थ रूढ़ हो जाता है। परिवर्णी बनाते समय मुख्यत: सुविधा को ध्यान में रखा जाता है। इसीलिए आरंभिक वर्ण, या अंतिम वर्ण को जोड़ा या छोड़ा जा सकता है। इसमें बिन्दी नहीं लगार्इ जाती है। शब्दों का क्रम भी अनिवार्य नहीं।
संक्षिपित की तरह परिवर्णी शब्द भी दो प्रकार के हैंµहिन्दी शब्दों से निर्मित तथा अंग्रेजी शब्दों से निर्मित। हिन्दी के शब्द-समूहों की परिवर्णी कम प्राप्त होती है। अधिकांश परिवर्णी हिन्दी-अंग्रेजी के मिश्रित शब्द-समूह से निर्मित मिलती है। नीचे कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैंµ
परिवर्णियाँ पूर्ण रूप
विहिप विश्व हिन्दी परिषद
डूसू क्न्ैन् क्मसीप न्दपअमतेपजल ैजनकमदजश्े न्दपवद
हुडको भ्न्क्ब्प्व् भ्वनेपदह ंदक न्तइंद क्मअमसवचउमदज ब्वतचवतंजपवद
यूनिसेफ न्छप्ब्म्थ् न्दपजमक छंजपवदे प्दजमतदंजपवदंस ब्ीपसकतमद म्उमतहमदबल थ्नदकण्
ग) संप्रदान तत्पुरूष - राह खर्च (राह के लिए खर्च)
हवनसामग्री (हवन के लिए सामग्री)
(घ) अपादान तत्पुरूष µ बंधन मुक्त (बंधन से मुक्त)
ऋणमुक्त (ऋण से मुक्त)
(³) संबंध तत्पुरूष - सुखसागर (सुख का सागर)
विचाराधीन (विचार के आधीन)
लखपति (लाखों का पति)
(च) अधिकरण तत्पुरूष - कविशिरोमणि (कवियों में शिरोमणि)
गृहप्रवेश (गृह में प्रवेश)
इनके अतिरिक्त तत्पुरूष समास के दो अन्य भेद हैंµन×ा और अलुक
(ज) न×ा तत्पुरूष-में 'न का किसी अन्य शब्द से समास होता है। इसके पूर्वखंड में निषेधार्थक (अ, अन) उपसर्ग का प्रयोग होता है। जैसेµ
अयोग्य ¾ न योग्य
नापसंद ¾ न पसंद
अपूर्ण ¾ न पूर्ण
अनपढ़ ¾ न पढ़ा हुआ
असत्य ¾ न सत्य
(ज) अलुक तत्पुरूष-जब किसी सामाजिक शब्द के पहले पद की संस्Ñत विभकित का लोप नहीं होता तो उसे अलुक तत्पुरूष कहते हैं। जैसेµ
मनसिज ¾ मनसि ़ ज
सरसिज ¾ सरसि ़ ज
वाचस्पति ¾ वाच: ़ पति
हिंदी में तत्पुरूष समास से बने कुछ सामाजिक शब्दों में शब्द-क्रम बदल देने से अर्थ में परिवर्तन आ जाता है। जैसे-
बहुब्रीहि समास ;।जजतपइनजपअम ब्वउचवनदकद्ध - इसमें कोर्इ पद प्रधान नहीं होता बलिक कोर्इ अन्य ही पद प्रधान होता है। दोनों पद मिलकर किसी अन्य अर्थ (व्यकित) का बोध कराते हैं। प्राय: ये सामाजिक पद विशेषण होते हैं और विग्रह करने के लिए 'जिसका या 'वाला शब्द का प्रयोग होता है। जैसे-
बहुब्रीहि ¾ बहुत हैं धान जिसके (संपन्न व्यकित)
चक्रपाणि ¾ चक्र है पाणि में जिसके (विष्णु)
चतुरानन ¾ चार हैं मुख जिसके (ब्रह्राा)
कर्मधारय समास ;।चचवेपजपवदंस ब्वउचवनदकद्ध µ इस समास के पदों में उपमेय-उपमान अथवा विशेष्य-विशेषण का संबंध होता है तथा विग्रह करने पर दोनों खंडों में कत्र्ता कारक की ही विभाकित रहती है। जैसेµ
सज्जन ¾ सत है जो जन (विशेषण़विशेष्य)
चंद्रमुख ¾ चंद्र के समान मुख (उपमाऩउपमेय)
द्विगु समास ;छनउमतंस ब्वउचवनदकद्ध µ जिस समास में पहला पद संख्यावाचक हो और दूसरा पद मुख्य हो, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे-        शताब्दी ¾ सौ अब्दों (वषो±) का समूह
त्रिलोकी ¾ तीन लोकों का समूह
अठन्नी ¾ आठ आनों का समूह
त्रिफला ¾ तीन फलों का समूह
द्वन्द्व समास ;ब्वउचनसंजपअम ब्वउचवनदकद्ध - जहाँ दोनों पर प्रधान हों और विग्रह करने पर स्वतंत्रा शब्दों के बीच 'और, 'तथा, 'या संयोजक का प्रयोग किया जाए, वहां द्वन्द्व समास होता है। जैसे-
माता-पिता ¾ माता और पिता
दाल-रोटी ¾ दाल और रोटी
सुख-दुख ¾ सुख और दुख
भला-बुरा ¾ भला और बुरा
छोटा-बड़ा ¾ छोटा या बड़ा
सामासिक शब्दों के रचना प्रकार
हिंदी में सामासिक शब्दों की रचना तीन प्रकार से होती हैµ
तत्सम ़ तत्सम शब्द
(क) गुण़हीन ¾ गुणहीन
(ख) जल़वायु ¾ जलवायु
तदभव ़ तदभव शब्द
(क) बैल़गाड़ी ¾ बैलगाड़ी
(ख) खêा़मीठा ¾ खêामीठा
आगत ़ आगत शब्द
(क) आराम़गाह ¾ आरामगाह
(ख) बिल़बुक ¾ बिलबुक
उपरोक्त समान òोत से निर्मित होने वाले सामासिक शब्दों को समòोतीय कहा जाता है। दूसरी ओर दो भिन्न-भिन्न òोतों से निर्मित समास को विषमòोतीय कहा जाता है, जैसे-
(क) माध्यमिक (तत्सम) ़ बोर्ड (विदेशी) ¾ माध्यमिक बोर्ड
(ख) माँग (विदेशी) ़ पत्रा (तत्सम) ¾ माँगपत्रा
(ग) भाड़ा (तदभव) ़ क्रय (तत्सम) ¾ भाड़ाक्रम              



CTET 2011 SOLVED QUESTION PAPER

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CTET 2011 SOLVED QUESTION PAPER
CHILD DEVELOPMENT AND PEDAGOGY 


















Saturday, September 6, 2014

Good Story

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Good Story

 मित्रो आज आपको एक बच्चे की कहानी सुनाता हूँ जो लन्दन के एक बहुत गरीब फटेहाल परिवार में पैदा हुआ | उसे स्कूल में ढंग से कुछ समझ में भी नहीं आता था और अध्यापक उसे अक्सर बेंत से सजा दिया करते थे तंग आकर बच्चे की माँ ने स्कूल में भेजना बंद कर दिया | अब उस गरीब बच्चे को एक जिल्दसाज के यहाँ काम पर भेज दिया गया जैसा सामान्यत गरीब पिछडो के साथ होता ही है | यह बच्चा दिन में जिल्द बंधता था और रात में उन्ही किताबो को पढ़ता था | एक दिन इस बच्चे को विज्ञान शो का एक मुफ्त टिकेट मिल गया |
इस विज्ञान शो को एक विज्ञानी डेवी दिखा रहे थे सब लोग आनंद ले रहे थे जबकि यह बालक उस सम्पूर्ण प्रयोग को अपनी डायरी में लिख रहा था, जिसे की दिखाया जा रहा था | इस बच्चे में विज्ञान में कुछ करने की ललक थी तो इसने उस नोट बुक की जिल्द बना कर विज्ञानी डवी को दी | शायद इसी से प्रभावित होकर उनके साथ काम करने का मौका मिल जाए |
मित्रो एक आम गरीब और सामाजिक रूप से निम्न दर्जे वाले के पास ना धन, ना जमीन, ना प्रभाव होता हे जिसके दमपर वह अपने जीवन में कुछ आगे बढ़ सके | उसके पास सिर्फ खुद का शरीर, दिमाग और आशा होती है | शरीर के द्वारा दूसरो के खेतो, फैक्टरियो में मजदूरी करके एक गरीब और निम्न व्यक्ति अपनी जीविका चलाता है |

कई वर्षो बाद डेवी को एक सहायक की जरुरत हुई और उसे यह गरीब बच्चा याद आया | अब वह एक किशोर बन गया, उसे नौकरी डे दी गयी | इस लड़के ने डेवी को कहा उसे विज्ञान के काम कर के बहुत अच्छा लगता है तब डेवीने कहा तुम अपने आप को विज्ञान से दूर ही रखो तुम्हारी खस्ता हालत में तुम साफ सफाई और मेरे सहायक का काम करके थोडा पैसा कमा लो वही अच्छा है | तब किशोर ने कहा सर पैसा तो सभी कमाते है पर विज्ञान में काम करके मानवता की सेवा की जा सकती है |

आपको नही लगता की सेवा सद्भावना जैसे कार्य एक गरीब को ज्यादा अच्छे लगते है क्योकि वह स्वयं उन्ही परिस्थितियों में रह चूका होता है | उसे अहसास होता है की मदद की कितनी आवश्यकता होती है जीवन में|

जब इस बच्चे ने पहली इलेक्ट्रिक मोटर बनायीं तो इसने पूरी दुनिया को बदल दिया | आप सोच सकते हे बिना मोटर के आज दुनिया चल सकती है | पखा, एसी, फेक्टरिया, पम्प और भी ना जाने अनगिनत उपकरण आज मोटर से चलते है कितनी कृतज्ञ है मानवता उस गरीब फटेहाल बच्चे की जिसे दुनिया ने प्रारंभीक शिक्षा तक भी नहीं दी डडो से सजा दी और उसने दुनिया को क्या दिया | एक अद्भुत अविष्कार जो आज हमारी दुनिया को चला रहा है |
उसके इस अविष्कार से उसका मालिक डेवी चिढ गया और उसे कांच बनाने की नयी विधी खोजने में लगा दिया| कांच के बारे में इस लड़के को कुछ भी नही पता था उसने वहा ४ साल बर्बाद किये और नाकामी की निशानी एक कांच की सिल्ली अपने साथ ले कर वापस लन्दन आया और काम करने लगा |

इसके बाद इस बच्चे ने दुनिया का पहला जनरेटर बनाया | अब आप जब चाहे बिजली बना सकते थे | देखो कितना बड़ा अहसान इस बालक ने इस दुनिया पे किया | आज भी बिजली उसी के बनाये सिद्धांत पर बन रही हे |
इस प्रकार उसने मोटर, जनरेटर, ट्रांसफार्मर , चुम्बकीय क्षेत्र, विद्युत क्षेत्र , प्रकाश का चुम्बकीय क्षेत्र से प्रतिक्रिया, और ना जाने कितने काम किये किसी का पेटेंट नहीं कराया | उसके उद्देश्य सिर्फ विज्ञान के द्वारा मानवता का भला करना था सो उसने किया | मित्रो पता हे उसका नाम क्या था – माइकल फेराडे |

जब उसके सिद्धोंतो की गणितीय व्यख्या का समय आया तो उस विज्ञानी को बड़ी कठिनाई हुइ क्योकि गरीबी के कारण वह प्रारम्भिक शिक्षा नहीं ले पाया | अब आपको नहीं लगता की अच्छी प्रारंभिक शिक्षा का कितना महत्व है |

में आज आपके सामने अच्छे से अपने विचार रख पा रहा हु इसके पीछे उन कांग्रेस सरकारों की नीतियों योजनाओ का बड़ा हाथ है जिसने देस में गरीबो को भेदभाव रहित शिक्षा देने में बड़ा योगदान दिया | आजाद भारत के एक बड़े वर्ग को मुख्य धारा में लाने में आज उसके योगदान को नाकारा नहीं जा सकता | भूमि सुधार और वितरण बैंक राष्ट्रीय कारण शिक्षा, स्वस्थ , पेंशन और अनगिनत योजनायो के द्वारा जितना भला किया वह एक मिसाल है |

आज आप और हम उस सरकार की बुरइयो को देख पा रहे इसमे भी उनका योगदान रहा है हलाकि की उनके भ्रष्टाचार की सीमा हो गयी थे और उन्हें सबक भी मिल गया |

मित्रो मेरा दिल उस गरीब और महान बच्चे के प्रति बहुत सहानुभूति रखता है क्योकि मेरे पिता अपने बचपन में घोर ग़रीबी देख चुके है याद रखो मित्रो गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े लोगो के पास अपना शरीर और दिमाग ही है जिसके दम पर वे उच्च स्थान हासिल कर सकते है |
अच्छी शिक्षा ग्रहण करो मेहनत करो आगे बढ़ो और दूसरो को भी आगे बढाओ




Jean Piaget: Child Development Psychology, The great pioneer of the constructivist theory of knowing i.e. Epistemology

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Jean Piaget: Child Development Psychology, The great pioneer of the constructivist theory of knowing i.e. Epistemology

Jean Piaget was a:
a) Child psychologist
b) Developmental
psychologist
c) Biologist
d) Genetic Epistemologist
Ans - D

 Jean Piaget (1896 - 1980) was employed at the Binet Institute in the 1920s, where his job was to develop French versions of questions on English intelligence tests.


He became intrigued with the reasons children gave for their wrong answers on the questions that required logical thinking. He believed that these incorrect answers revealed important differences between the thinking of adults and children.

Piaget was the first psychologist to make a systematic study of cognitive development. His contributions include a theory of cognitive child development, detailed observational studies of cognition in children, and a series of simple but ingenious tests to reveal different cognitive abilities.

Before Piaget’s work, the common assumption in psychology was that children are merely less competent thinkers than adults. Piaget showed that young children think in strikingly different ways compared to adults. According to Piaget, children are born with a very basic mental structure (genetically inherited and evolved) on which all subsequent learning and knowledge is based.


here Are Three Basic Components To Piaget's Cognitive Theory:


1. Schemas


(building blocks of knowledge)

2. Processes that enable the transition from one stage to another
(equilibrium, assimilation and accommodation)

3. Stages of Development:


· sensorimotor,

· preoperational,

· concrete operational,

· formal operational

RAJASTHAN TEACHER ELIGIBILITY TEST PAPER - 2011

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राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011
RAJASTHAN TEACHER ELIGIBILITY TEST PAPER - 2011 
Sandipani भवन, माध्यमिक शिक्षा कालोनी के बोर्ड,
सिविल लाइंस, अजमेर 305,001 (राज)

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर 31 जुलाई, 2011 को राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (RTET 2011) का आयोजन किया.


आरटेट -2011 परीक्षा
(31/07/2011 को आयोजित)
(स्मृति पर आधारित प्रश्न)

निम्नलिखित प्रश्न उक्त परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की स्मृति के आधार पर तैयार कर उनके संभावित उत्तर के साथ इसलिए दिए गए हैं, ताकि अन्य परीक्षार्थियों को मार्गदर्शन मिल सके. यहां सभी प्रश्न पत्रों के प्रश्न मिश्रित हैं. उत्तर प्रश्नों के ठीक सामने हैं और अगर उनमें कोई त्रुटि या विरोधाभास आपको नजर आता है, तो कृपया पोस्टेड के माध्यम से अवगत कराएं, जिससे उनमें सुधार किया जा सके. अगर आप इस परीक्षा में बैठे हैं तो कृपया इस पोस्ट के निचे टिप्पणियाँ दे कर पोस्टेड के माध्यम से अन्य प्रश्नों की जानकारी दें.

  1. राष्ट्रीय -2005 पाठ्यचर्या के अनुसार एक शिक्षक के एक सप्ताह के शिक्षण घंटे - 40
  2. जम्भोजी का जन्म स्थान - पीपासर
  3. गोगामेड़ी का मेला कहां भरता है - हनुमानगढ़
  4. अग्निकुण्ड के प्रमाण कहां मिले हड़प्पा संस्कृति
  5. तेंदुलकर ने छह छक्के लगाए. इसमें उद्देश्य है - तेंदुलकर
  6. दोनों पद किसमें प्रधान होते हैं - द्वन्द्व समास में
  7. किसमें द्वन्द्व समास है - नर - नारी
  8. अभिधा शब्द शक्ति में कौनसा अर्थ प्रकट होता है - वा 'यार्थ
  9. 1 कौनसी संख्या है - न भा 'य न अभा' य (उपरोक्त दोनों)
  10. जीन प्याजे ने विकास की अवस्थाओं के लिए किसका अध्ययन आवश्यक बताया - संज्ञानात्मक
  11. एक बालक अमूर्त से मूर्त विचार स्थिति में कब पहुंचता है - 7-12 वर्ष
  12. गुण संधि किसमें है - भारतेंदु
  13. संप्रदान कारक किसमें है - राजा ने निर्धनों को कंबल बांटे
  14. 'को और के लिए' का बोध किसमें होता है - संप्रदान कारक
  15. श्मश्रु का तद्भव शब्द क्या है - मूंछें
  16. टंगस्टन का संकेत है - डब्ल्यू
  17. कोशिका की ऊर्जा कहां संगृहीत रहती है - माइट्रोकॉंड्रिया
  18. डेंगू किस म 'छर के काटने से होता है - एडीज
  19. रतौंधी किसकी कमी से होता है - विटामिन ए
  20. दूर दृष्टि दोष वाले व्यक्ति को कौनसे लेंस की सलाह दी जाती है
  21. टाइगर स्टेट - मध्यप्रदेश (टाइगर स्टेट का दर्जा कर्नाटक के पास है, जो विकल्प प्रश्न सभी पत्र मौजूद नहीं है)
  22. कुत्ता मछली कहां पाई जाती है - समुद्र
  23. गणगौर कब मनाई जाती है - मास चैत्र की तृतीया
  24. लड़के और लड़की की विवाह की न्यूनतम क्या उम्र है - 21 वर्ष और 18 वर्ष
  25. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है - राष्ट्रपति
  26. सेना का सर्वोच्च सेनापति कौन होता है - राष्ट्रपति
  27. संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई - दिसंबर, 1946
  28. संविधान कब लागू हुआ - 26 १९५० जनवरी
  29. 44 वें संशोधन के बाद कितने मौलिक अधिकार रह गए थे - 6
  30. संविधान संशोधन के बाद 51 क के अंतर्गत कितने मौलिक कर्तव्य हैं - 11
  31. राजस्थान से लोकसभा में कितने सदस्य चुने जाते हैं - 25
  32. राष्ट्रपति का निर्वाचन कौन करता है - लोकसभा, राज्यसभा व विधानसभा के निर्वाचित सदस्य
  33. राज्यसभा में राष्ट्रपति अधिकतम कितने सदस्यों की नियुक्ति कर सकता है - 12
  34. विजय स्तंभ किसने बनवाया - राणा कुम्भा
  35. झीलों की नगरी किसे कहते हैं - उदयपुर
  36. सर्वाधिक नलकूप किस राज्य में है
  37. कहां चीनी का उत्पादन नहीं होता
  38. एक लड़की कॉलेज से आते ही कोट जमीन पर फेंक देती है. उसकी मम्मी ने कहा कि इसे उठाकर खूंटी पर टांगो. आगे से वह लड़की ऐसा ही करने लगी. इसमें कौनसा अधिगम है -
  39. एडवोकेट का समानार्थक है - वकील
  40. ग्रामर की स्पेलिंग - व्याकरण
  41. ओबिडिएंट की स्पेलिंग - आज्ञाकारी
  42. ध्वन्यात्मक ट्रांसक्रिप्शन
  43. पेड़
  44. ये
  45. गद्यांश का शीर्षक - संगति
  46. केंद्रीय भाव - कुसंग का प्रभाव
  47. कुसंग का अर्थ है - बुरी संगति
  48. भाववाचक संज्ञा में समाहित है - गुण व दोष
  49. पवन में संधि है - पो + अन्
  50. वृक्षच्छाया - वृक्ष + छाया
  51. कौनसा शब्द घोष नहीं है - छ
  52. उद्देश्य व विधेय किसके अंग है - वाक्य के
  53. हिन्दी में कितने वचन होते हैं - दो
  54. कौनसा चिन्ह है - अर्ध विराम
  55. सरकारी अधिसूचना का प्रकाशन होता है - गैजेट
  56. सरकारी कार्यालयों में सभी की सूचनार्थ भेजा जाने वाला पत्र - अधिसूचना
  57. बेलन का आयतन व वक्राकार पृष्ठ का क्षेत्रफल
  58. परमाणु क्रमांक बराबर होता है - प्रोटॉन की संख्या के
  59. हीरो का है सूत्र - √ (सा) (एसबी) (सुप्रीम कोर्ट)
  60. शिक्षा की गुणवत्ता
  61. अभिवृत्ति से क्या तात्पर्य है -
  62. सबसे तेज गति होती है प्रकाश की
  63. सबसे पास - पास अणु होते हैं - ठोस
  64. एक लीटर पानी का ताप एक सेंटीग्रेट बढाने के लिए आवश्यक ऊष्मा -1000 कैलोरी
  65. सरल वाक्य क्या है - जिसमें एक कर्ता, एक कर्म और एक क्रिया हो
  66. किस समास में पहला पद संख्यावाचक होता है - द्विगु
  67. विपरीत का अर्थ क्या होता है - विलोम शब्द
  68. सिर फिरना का अर्थ है
  69. मेरे सामने शेर आने पर - मेरे होश उड़ गए
  70. कमल का पर्यायवाची नहीं है - मनसिज
  71. कौनसे शब्द सभी तत्सम शब्द हैं -
  72. अपना हाथ जगन्नाथ का अर्थ है - अपने हाथ से ही काम करने पर कल्याण होता है
  73. कौनसा ध्वनि में अलग है - खाद्य
  74. अलग ध्वनि है - रसायन विज्ञान
  75. अलग ध्वनि है - सिटी
  76. डिक्रीज इन साइज एंड अमाउंट
  77. सलीम चिश्ती की दरगाह - फतेहपुर सीकरी
  78. परतदार चट्टानें कौनसी होती हैं अवसादी चट्टानें
  79. वैश्विक तापमान किस गैस के कारण बढ़ता है - कार्बन डाईऑक्साइड
  80. कौनसा मंडल सबसे नीचे होता है - क्षोभ मंडल
  81. वर्षा जल को संचित करने का फायदा - भूजल स्तर ऊपर आता है
  82. किसी के कहे हुए शब्दों को दर्शाने के लिए किस चिन्ह का प्रयोग होता है - उद्धरण चिन्ह
अंग्रेजी में
  1. 40 - एक 2005 राष्ट्रीय पाठ्यचर्या शिक्षक शिक्षण घंटे एक सप्ताह के अनुसार
  2. Jmbhoji जन्मस्थान - Peepasr
  3. कहाँ निष्पक्ष Gogamedi प्यूरी - हनुमानगढ़
  4. Agnikund के सबूत कहाँ पाया - हड़प्पा संस्कृति
  5. तेंडुलकर एक छक्का तोड़ी. उद्देश्य - तेंडुलकर
  6. कनेक्शन में झगड़ा - क्या गठबंधन प्रभुत्व है
  7. एक विवाद यौगिक क्या है - पुरुष - महिला
  8. Abhidha शब्द का अर्थ है जो सत्ता में प्रकट होता है - या "Yartha
  9. नंबर क्या है 1 या टी व्यक्ति (दो ऊपर) मान्य ए.बी.ए. नहीं है '
  10. Pyaje करने के लिए आवश्यक जीन के विकास के लिए शर्तों के किसका अध्ययन - संज्ञानात्मक
  11. 7-12 साल - जब एक लड़का सार ठोस विचारों में पहुँचता है
  12. संयुक्त संपत्ति क्या है - भारतेंदु
  13. संप्रदान कारक क्या है - गरीबों को राजा वितरित कंबल
  14. 'और' क्या धारणा है - संप्रदान कारक
  15. मूंछें - शब्द मूंछें Tdbv क्या है
  16. टंगस्टन का प्रतीक - डब्ल्यू
  17. सेल जहां ऊर्जा संग्रहीत है - Maitrocondria
  18. डेंगू जिसमें 'सीआर के काटने से है - एडीज
  19. कमी किसका है रतौंधी - विटामिन ए
  20. समुद्र - कहाँ एक कुत्ता मछली
  21. जब गणगौर मनाया जाता है - चैत्र माह तृतीया
  22. पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु क्या है - 21 साल और 18 साल
  23. कौन सुप्रीम कोर्ट की नियुक्ति - राष्ट्रपति
  24. राष्ट्रपति - सेना के सुप्रीम कमांडर कौन है
  25. जब संविधान सभा की पहली बैठक किया - दिसम्बर, 1946
  26. 26 जनवरी, 1950 - जब संविधान लागू हुआ
  27. 6 - 44 संशोधन के बाद ऐसी कोई मौलिक अधिकार था
  28. संशोधन के तहत, 51 की एक ऐसी मौलिक कर्तव्य - 11
  29. कितने सदस्यों को राजस्थान से लोकसभा के लिए चुने हैं - 25
  30. कौन अध्यक्ष निर्वाचित - लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के सदस्य निर्वाचित
  31. 12 - राष्ट्रपति राज्य सभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या में नियुक्त कर सकता है
  32. कौन जीत स्तंभ मिला - राणा आजाद पार्क
  33. उदयपुर - झीलों के शहर क्या है
  34. जो राज्य में अधिकांश कुओं
  35. कॉलेज से एक लड़की के फर्श पर कोट फेंकता है. कहा कि उसकी माँ एक खूंटी पैरों पर उठाया. लड़की के लिए यह कदम शुरू कर दिया. सीखना यह क्या है -
  36. अधिवक्ता की उपशब्द - वकील
  37. व्याकरण - व्याकरण की वर्तनी
  38. Obidiant वर्तनी - आज्ञाकारी
  39. ध्वन्यात्मक ट्रांसक्रिप्शन
  40. पेड़
  41. शीर्षक के इन पारित - स्थिरता
  42. मूल्य - Kusng के प्रभाव
  43. कंपनी Kusng मतलब है
  44. गुण और दोष - सार संज्ञा इसमें शामिल
  45. संधि में पवन - पो + अन्य
  46. Vrikshchchhaya - छाया पेड़?
  47. जी - क्या शब्द मत रोओ
  48. क्या हिस्सा वस्तु और विधेय - वाक्य
  49. कितने शब्दों के हिंदी में - दो
  50. जो एक संकेत है - अर्द्ध आग
  51. गैजेट्स - लोक अधिसूचना प्रकाशित हुआ है
  52. सरकारी कार्यालयों में सभी जानकारी के लिए भेजा पत्र - अधिसूचना
  53. सिलेंडर की मात्रा के क्षेत्र, घुमावदार पेज
  54. प्रकाश - सबसे तेज गति है
  55. ठोस - कंधे से कंधा मिलाकर अणु होते हैं
  56. पानी हीटिंग गर्मी की एक लीटर के लिए एक सी -1000 कैलोरी बढ़ाने की आवश्यकता
  57. क्या साधारण वाक्य है - कर्ता, कर्म और एक क्रिया बन
  58. यौगिक क्या पहली पोस्ट में अंक - Dvigu
  59. विपरीत क्या करता है - विलोम शब्द
  60. लाल सिर का मतलब है -
  61. जब मेरे सामने शेर - मैं था
  62. कमल के साथ पर्याय नहीं है - Mnsij
  63. क्या सभी इसी शब्द शब्द -
  64. जगन्नाथ अपने हाथ का अर्थ है - अपने हाथ कल्याण के लिए काम है
  65. ध्वनि में अलग क्या है - खाद्य
  66. विभिन्न ध्वनि - रसायन विज्ञान
  67. विभिन्न ध्वनि - सिटी
  68. Dikrij आकार और राशि
  69. सलीम चिश्ती की दरगाह - फतेहपुर सीकरी
  70. स्तरित चट्टानों क्या कर रहे हैं - तलछटी चट्टानों
  71. क्या गैस की वजह से वैश्विक बढ़ जाती
  72. वार्मिंग - कार्बन डाइऑक्साइड
  73. प्रणाली है जो नीचे है - troposphere
  74. संचित वर्षा जल का लाभ भूजल स्तर से ऊपर है
  75. क्या प्रतीक कहा जाता है को शब्दों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं - बोली के संकेत
नोट: सभी प्रश्न उम्मीदवारों की स्मृति के आधार पर कर रहे हैं